कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधना है- पुण्डरीक गोस्वामी

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हर की पैड़ी पर जारी रहा गंगा के साथ साथ ज्ञान,धर्म का प्रवाह
हरिद्वार। पुरूषोत्म मास में पवित्र हर की पैड़ी के मालवीय घाट पर पवित्र गंगा के तट श्रीगंगा सभा के तत्वावधान में मन्माध्व गौडेष्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज ने पाचवे दिन श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की करुणा, भक्ति और धर्म की महिमा का रसपूर्ण वर्णन सुनाया। कथा व्यास ने भगवान श्रीकृष्ण के विभिन्न लीलाओं की कथा सुनाते हुए श्रद्वालु श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इससे पूर्व पाचवे दिन कथा प्रारम्भ होने से पूर्व श्रीगंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम तथा महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने व्यास गदद्ी की पूजा अर्चना कर कथा व्यास पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज का माल्यापर्ण कर आर्शीवाद लिया। इस दौरान कथा व्यास का कथा यजमान अमृतसर के अग्रवाल परिवार के सभी सदस्यों ने भी पूजा अर्चना की। श्रीगंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कथा प्रारम्भ होने से पूर्व सभी का स्वागत करते हुए मॉ गंगा से सभी के लिए सुख-समृद्वि,कल्याण की कामना की।कथा व्यास पुण्डरीक गोस्वामी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की माखन चोरी और ग्वालबालों के साथ बाल लीलाओं का भी सुंदर वर्णन करते हुए श्रद्वालु श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान की बाल लीलाएं मनुष्य को सरलता, प्रेम और निष्कपट जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की करुणा, भक्ति और धर्म की महिमा का रसपूर्ण वर्णन सुनाया गया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल “हरे कृष्ण” और “राधे-राधे” के जयघोष से गूंज उठा। कथा के दौरान गोस्वामी जी ने भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह अवतार का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्चे भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, जो व्यक्ति ईश्वर पर अटूट विश्वास रखता है, उसे कभी भयभीत नहीं होना चाहिए। कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण ही सबसे सरल और श्रेष्ठ साधना है। मनुष्य यदि अपने जीवन में अहंकार त्यागकर सेवा, दया और भक्ति का मार्ग अपनाए, तो उसे परम शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। कथा के अंत में आरती और भजन संकीर्तन के साथ वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। कथा श्रवण करने वालों में श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम,उपाध्यक्ष हनुमंत झा,स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि,समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान,उज्जवल पण्डित,प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में श्रद्वालु श्रोता मौजूद रहे।

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