भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक: पुंडरीक गोस्वामी

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श्री गंगा सभा के तत्वावधान में हर की पैड़ी पर श्रीमदभागवत कथा ज्ञान सप्ताह शुरू

हरिद्वार। पवित्र हर की पैड़ी पर गंगाजी के प्रवाह के साथ ज्ञान और भक्ति का प्रवाह भी अगले सात दिनों तक प्रवाहित होगा। पवित्र गंगा के तट पर श्री गंगा सभा के तत्वावधान में मन्माध्व गौडेष्वर वैष्णवाचार्य पुण्डरीक गोस्वामी महाराज द्वारा श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा प्रारंभ हुई। रविवार देर सायं हर की पैड़ी के मालवीय घाट पर श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह प्रारंभ करते हुए कथा व्यास ने कहा कि मासो में मास पुरुषोत्तम मास,ग्रंथो में श्रेष्ठ ग्रंथ श्रीमद् भागवत और सभाओं में सर्वोत्तम श्रीगंगा सभा का संगम निश्चित ही राष्ट और समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। उ नीति का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि राजा कभी किसी का मित्र नहीं होता वह केवल स्वार्थ का होता है सच्चा मित्र वह है जो आपका कृतार्थ मानता है. कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से गंगा जी को स्वच्छ रखने की भी अपील की.
कहा कि संसार में क्या मेरा है क्या तेरा है का बोध हो जाए तो यह परम ज्ञान है। गोस्वामी पुंडरीक जी महाराज की श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। गंगा तट के निकट सजे भव्य पंडाल में भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत वातावरण दिखाई दिया। अग्रवाल परिवार अमृतसर के सौजन्य से आयोजित कथा का शुभारंभ श्री गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम एवं महामंत्री तन्मय वषिष्ठ ,सभापति कृष्ण कुमार ठेकेदार के साथ साथ कथा यजमान अग्रवाल परिवार के सदस्यो ने व्यास गदद्ी की पूजा अर्चना के साथ हुआ। इस दौरान श्रीगंगा सभा उपाध्यक्ष हनुमंत झा,स्वागत मंत्री सिद्वार्थ चक्रपाणि,समाज कल्याण मंत्री विकास प्रधान,प्रचार मंत्री गोपाल प्रधान के अलावा श्रीगंगा सभा के सभी पदाधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। गंगा तट पर गोस्वामी पुंडरीक जी महाराज ने अपने मधुर वाणी में श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं,बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है।
उन्होंने बताया कि कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और कथा श्रवण ही मनुष्य को दुखों से मुक्ति दिला सकता है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य को अपने जीवन का प्रत्येक क्षण अच्छे कर्मों और प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए। कथा सुनते समय श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए और “राधे-राधे” तथा “हरे कृष्ण” के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। भजन-कीर्तन ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने कथा का आनंद लिया और गंगा घाट पुरी तरह से भक्तिमय रंगों में सराबोर नजर आई।

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