राजधानी में बिगड़ती कानून और व्यवस्था में सुधार हेतु सामाजिक संस्थाओं के लोगों ने दिए सुझाव

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देहरादून। संयुक्त नागरिक संगठन के इस संवाद में शामिल लोगों की आम राय थी की मुख्यमंत्री मुख्य सचिव द्वारा जारी निर्देश अपराधियों में खौफ पैदा करने में नाकाफी है।इसके लिए स्मार्ट पुलिसिंग अवधारणा के अंतर्गत सख्त, संवेदनशील,
आधुनिक,मोबाइल सतर्क,जवाबदेह, विश्वसनीय,और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित तथा आधुनिक संसाधनों से पुलिस को सुसज्जित करना जरूरी होगा जैसा की दिल्ली,पुणे,हैदराबाद,झांसी शहरों में है। संवाद में अवधेश शर्मा ने शराबखानों, होटलो,माल,रिसॉर्टस में शराबियों के लिए दरवाजे रात्रि 10 बजे बंद कराने का सुझाव दिया और राज्य को मदिरालय न बनाने की मांग की।हरेंद्रसिंह रावत ने शराबी पर्यटकों द्वारा खुलेआम गोलीबारी कर ब्रिगेडियर एमके जोशी के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार करने की माग करते हुए इसे आबकारी विभाग की अकर्मण्यता करार दिया।आंदोलनकारी मधु त्यागी ने सभी मदिरालयों को रात्रि 10 बजे तक ही संचालन की अनुमति दिए जाने का सुझाव दिया।नरेश चंद्र कुलाश्री ने शिक्षण संस्थान छात्रवासो में ड्रग्स आदि नशीले पदार्थों की बढ़ते चलन पर अंकुश के लिए प्रबंधको,मकान मालिकों संचालकों की भी जिम्मेदारी तय करने की मांग करते हुए इन्हें भी रात्रि दस बजे तक बंद किए जाने का सुझाव दिया।।वीरू बिष्ट के अनुसार दून में मित्र पुलिस नहीं,अपराधियों की दुश्मन पुलिस होनी चाहिए।डॉक्टर अजीत गैरोला का मत था विगत आपदाओं तथा चारधाम यात्रा से सबक लेते हुए राज्य की भूस्थितिकी के संरक्षण,क्लाइमेट चेंज में बाधक बनी पर्यटकों की विशाल संख्या को कानून व्यवस्था के मद्देनजर नियंत्रित करना चाहिए़।हम भूटान की पर्यटन व्यवस्थाओं से सीख ले सकते हैं। रविंद्रसिंह गुसांई का मंतव्य था की पुलिस को राजधानी की सभी हाउसिंग सोसायटी, मोहल्ला समिति,गांव पंचायत,पार्षद,सामाजिक संस्थाओं के लोगों से सहयोग की पहल करना सामयिक होगा।जगमोहन मेहंदीरता ने दून में रह रहे बाहरी लोगों के सौ प्रतिशत सत्यापन की मांग की क्योंकि सत्यापन कार्य आधा अधूरा है। इनके अनुसार शहर में 24 घंटे पुलिस पेट्रोलिंग तथा शिक्षण संस्थानों के बाहर लोकल इंटेलीजेंस पुलिस की निगरानी को जरूरी बताते हुए शराबी वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को ही खत्म किया जाना जरूरी बताया गया।दिनेश भंडारी तथा हरेंद्र सिंह रावत ने शहर की कॉलोनियों में तथा आंतरिक तथा भीतरी सड़कों पर सीसीटीवी लगाने और इनकी 24 घंटे मॉनिटरिंग व्यवस्था को स्थिति में सुधार हेतु जरूरी बताया।अमरजीत भाटिया तथा ताराचंद गुप्ता ने जनपद की सभी सड़कों तथा चौराहों पर बड़े लेड स्पीड डिस्प्ले बोर्ड लगाने का सुझाव दिया जिससे बाहरी राज्यों से आए लापरवाह पर्यटकों/अपराधियों में खौफ पैदा हो सके। प्रदीप कुकरेती और सुशील त्यागी के सुझाव थे की शहर में नियमित रूप से रात दिन पुलिस पीसीआर के माध्यम से निगरानी की कारगर व्यवस्था करने के साथ पुलिस विभाग को जन सहयोग भी लेना चाहिए। इनकी राय में राजधानी में पुलिस विभाग में कार्मिकों तथा आधुनिक संसाधनों की अपेक्षाकृत कमी है लेकिन मुख्यमंत्री के अधीन गृह विभाग द्वारा पुलिस विभाग की संस्तुतियों पर फैसला न लिए जाने,आवश्यक आधुनिक कारगर संसाधनों को पर्याप्त रूप से उपलब्ध न कराना भी बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है और मुख्यमंत्री को खुद संबंधित फाइलों की समीक्षा कर तत्काल जरूरी निर्णय लेने चाहिए।

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