राजधानी देहरादून के कोरोनेशन अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्थाओ पर हमें शर्म आती है और दुख भी होता है: सुशील त्यागी

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*दर्द से तड़पती युवती ने खोली अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल,इमरजेंसी से ओपीडी के काटे चक्कर*

देहरादून.
दून के कोरोनेशन अस्पताल के आपातकालीन विभाग में व्याप्त कुव्यवस्थाओं को दूर करने/प्रियंका चौहान को इमरजेंसी में समुचित चिकित्सा न मिलने के जिम्मेदार अधिकारी स्टाफ को दुर्गम क्षेत्र में ट्रांसफर करने की मांग को लेकर सचिव संयुक्त नागरिक संगठन ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में स्वास्थ्य सचिव राजेश कुमार द्वारा इमरजेंसी सेवाओं हेतु 1 साल पूर्व जारी एसओपी के अंतर्गत मरीजों की चिकित्सा में नैतिक दायित्वो,मरीज के अधिकारों को भी सुनिश्चित करने के साथ साथ सभी निर्देशों को राज्य के चिकित्सालयों के आपातकालीन कक्षों के बाहर प्रदर्शित करने की मांग की मांग की गई है।

संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से राज्यपाल मुख्यमंत्री मुख्यसचिव स्वास्थ्य सचिव जिलाधिकारी को भेजे गए पत्रों में *दर्द से तड़पती युवती ने खोली अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल,इमरजेंसी से ओपीडी के काटे चक्कर* शीर्षक से प्रकाशित समाचार(सलग्न कटिंग)तथा हादसे में घायल युवती प्रियंका चौहान के आंसू पीड़ाओं को व्यक्त करती वीडियो देखकर संगठन सचिव सुशील त्यागी ने लिखा कि राजधानी के कोरोनेशन अस्पताल में व्याप्त कुव्यवस्थाओ पर हमें शर्म आती है,दुख भी। लिखा है सरकारी तंत्र के मुखिया आप सब इस अस्पताल से मात्र कुछ किलोमीटर की परिधि में कार्यरत है लेकिन जिम्मेदार कुछ चिकित्सकों में लापरवाही व्याप्त जो दुर्भाग्य है। इसे रोका जाना होगा। इन्होंने अनुरोध किया है की इस दर्दनाक घटना में कठोर कार्यवाही करते हुए पूर्व स्वास्थ्य सचिव राजेश कुमार द्वारा जनवरी 2025 में जनहित में आपातकालीन सेवाओं के संबंध में जारी एसओपी को प्रदेश के सभी चिकित्सालयों के आपातकालीन कक्षाओं के बाहर सूचनापट्ट लगाकर सार्वजनिक करने का कष्ट करें।इससे आपातकालीन सेवाओं की सुलभता तथा चिकित्सा अधिकारियों की आंखें 24×7 खुली रहेगी तथा गंभीर रोगी भी राहत महसूस कर सकेंगे!एसओपी के अंतर्गत जारी निर्देश में आपातकालीन चिकित्सा के दौरान मरीज की देखभाल में नैतिक दायित्वों को भी रेखांकित करते हुए रोगियों के हितों और अधिकारों को प्राथमिकता स्पष्ट करने,आपातकाल चिकित्सा में मरीज की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखने को आवश्यक बनाते हुए आपातकाल व्यक्ति-केंद्रित देखभाल व्यवस्था सुनिश्चित करने,एसओपी के अंतर्गत पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की व्यवस्था करने तथा इलाज में अनावश्यक देरी पर जिम्मेदार कार्मिक पर कार्यवाही को भी गिनाया गया है। ज्ञातव है की पूर्व में सभी चिकित्सा अधिकारियों को ये निर्देश जारी किए गए पर नतीजा सिफर है।

त्यागी ने आपातकालीन चिकित्सा में विभाग को तत्काल उचित जीवन रक्षक देखभाल प्रदान करने,भावनात्मक सुरक्षा और व्यक्ति-केंद्रित देखभाल करने के साथ आपातकालीन विभाग रोगी की देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन व स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित करना भी निर्देशों का उल्लेखनीय भाग बताया है। इनमें किसी मरीज को देखने में हुई अनावश्यक देरी की स्थिति में इमरजेंसी प्रभारी/एमएस दोषी ईएमओ,एसआर या संकाय सदस्य के विरुद्ध कार्रवाई करने के भी निर्देश भी महत्वपूर्ण हैं और एसओपी में शामिल हैं।

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