“सखी परियोजना” को लगे पँख, सखी उत्सव का हुआ आयोजन

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-1300 से अधिक सखी दीदियों की रही सहभागिता, रस्सा-कस्सी, मटका दौड़, चम्मच दौड़ और तीन टांग दौड़ जैसी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया

पंतनगर। हिंदुस्तान जिंक के पंतनगर प्लांट द्वारा सीएसआर पहल के अंतर्गत आयोजित “सखी उत्सव” कार्यक्रम में 1300 से अधिक सखी दीदियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। यह कार्यक्रम हिंदुस्तान जिंक के सहयोग से मंजरी फाउंडेशन द्वारा संचालित सामुदायिक विकास की “सखी परियोजना” के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सखी परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए मेटल प्लांट की हेड सीएसआर नम्रा ने बताया कि यह परियोजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने तथा सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परियोजना से जुड़ी महिलाएं विभिन्न आजीविका संबंधी कार्यों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं और अपने परिवार एवं समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
मुख्य अतिथि के रूप में पंतनगर प्लांट की निदेशक अनामिका झा, उप निदेशक नीरज कुमार एवं एचआर प्रतिनिधि रितिका उपस्थित रहे। निदेशक अनामिका झा ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “जब तक हम स्वयं आगे बढ़ने का संकल्प नहीं लेते, तब तक कोई हमें आगे नहीं बढ़ा सकता। हम पूरी तरह से आपके साथ हैं और आपके बेहतर भविष्य के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सखी उत्सव दुनिया तक पहुंचे, यही हमारी कामना है।” कार्यक्रम में ऊधम सिंह नगर की डी.पी.ओ. व्योमा जैन ने महिलाओं के अधिकारों तथा पॉक्सो एक्ट के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और आग्रह किया कि यह जागरूकता प्रत्येक घर तक पहुंचाई जाए।
सखी उमंग सोसाइटी की अध्यक्ष रिहाना ने फेडरेशन द्वारा दिए जा रहे ऋण, ब्याज दरों एवं विभिन्न कार्यों की जानकारी दी। वहीं मंजरी पंतनगर की टीम लीडर खैरुल ने अपने संबोधन में बताया कि परियोजना के माध्यम से बैंक द्वारा अब तक 5 करोड़ 11 लाख रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है, जिसमें उच्च शिक्षा हेतु ऋण भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से महिलाओं के सम्मान में वृद्धि हुई है तथा लिंग भेदभाव में कमी आई है। “महिलाओं का सम्मान ही महिलाओं का सबसे बड़ा सम्मान है,” उन्होंने कहा। सखी उत्सव के दौरान दीदियों ने अपने जीवन में आए आर्थिक एवं सामाजिक बदलावों को साझा किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भोजपुरी कजरी गीत, पंजाबी गीत, बंगाली नृत्य सहित विभिन्न प्रस्तुतियां दी गईं। इसके साथ ही रस्सा-कस्सी, मटका दौड़, चम्मच दौड़ और तीन टांग दौड़ जैसी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह और उमंग का माहौल बना रहा। यह आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास, एकता और सशक्तिकरण का प्रतीक बनकर उभरा तथा समुदाय विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम सिद्ध हुआ।

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