मानव वन्य जीवसंघर्ष विराम हेतु नीति तत्काल लागू करने हेतु वन विभाग के अधिकारियों को भेजा मांग पत्र

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देहरादून. उत्तराखंड में जंगली जानवरों की वज़ह से उत्पन्न मानव वन्यजीवसंघर्ष को रोकने के लिए दीर्घ कालिक उपाय/वन्यजीव संरक्षण नीति तत्काल लागू करने की मांग करते हुए प्रबुद्ध जनों की ओर से वन विभाग के अधिकारियों को मांग पत्र भेजा गया है।
संयुक्त नागरिक संगठन की ओर से भेजे गए ज्ञापन में जंगली जानवरों का जीवन और मानव-वन्यजीव संघर्ष मुख्य रूप से पशु पक्षियों के निवास स्थान के विनाश,अवैध शिकार,जलवायु परिवर्तन,जंगलों में आग और भोजन की कमी को संघर्ष का मुख्य कारण बताते हुए लिखे पत्र में बताया गया है की जंगली जानवरों के निवास स्थान का विनाश (हैबिटेट लॉस),विकासात्मक परियोजनाओं,सड़कों और शहरीकरण के कारण जंगलों का दायरा सिमट रहा है,जिससे वे बस्तियों की ओर आने को मजबूर हैं।जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज)तापमान में वृद्धि के कारण, गुलदार और भालू जैसे जानवर सर्दियों में हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) नहीं कर पा रहे हैं,जिससे उनकी गतिविधि बढ़ जाती है।सूखे और बारिश में अनियमितता से जंगल में भोजन की कमी हो रही है,जिससे वे गांवों की ओर आ रहे हैं।हर साल लगने वाली जंगल की आग से वन्यजीवों का आवास और भोजन नष्ट हो रहा है। राज्य में तेंदुए जैसे जानवरों का खाल और अंगों के लिए अवैध शिकार किया जा रहा है। भोजन की कमी के कारण जानवर रिहायशी इलाकों में आ रहे हैं,जहाँ वे मवेशियों और इंसानों को शिकार बना रहे हैं। समस्या के स्थाई समाधान हेतु वन्यजीव संरक्षण हेतु ठोस नीति बनाई जाने की इस मांग पत्र पर जगमोहन मेहंदीरता, प्रदीप कुकरेती, सुशील त्यागी, नवीन सदाना,मुकेश शर्मा आदि जागरूक लोगों के भी हस्ताक्षर हैं।

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