सनातन परंपरा की ओर: हिन्दी टेलीविजन अभिनेत्री श्रेष्ठी रोड़ी जी दर्शनार्थ आयी परमार्थ निकेतन

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ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज हिन्दी टेलीविजन जगत की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री श्रेष्ठी रोड़ी जी दर्शनार्थ आयी। उन्होंने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के दिव्य सान्निध्य में माँ गंगा की पावन आरती में सहभाग कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
श्रेष्ठी रोड़ी जी का आगमन एक युवा चेतना का प्रतीक है, आज भौतिकता, प्रतिस्पर्धा और व्यस्त़ जीवन-शैली के बीच अपने मूल्यों, संस्कृति और आत्मिक शांति की खोज में सनातन परंपरा की ओर लौट रही है। परमार्थ निकेतन की पावन भूमि पर पहुँचकर उन्होंने कहा कि ऋषिकेश की दिव्यता, गंगा जी की निर्मल धारा और पूज्य स्वामी जी का सान्निध्य ने भीतर तक स्पर्श किया।।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, संस्कृति और चेतना हैं। आज जब युवा पीढ़ी दिशाहीनता, तनाव और मूल्य-संकट से गुजर रही है, तब ऐसे आध्यात्मिक अनुभव उन्हें संतुलन, शांति और सही दिशा प्रदान करते हैं।
पूज्य स्वामी जी ने टेलीविजन जैसे सशक्त माध्यम की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि टीवी केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि यह समाज और विशेषकर युवा पीढ़ी के जागरण एवं मार्गदर्शन का प्रभावी माध्यम है। यदि कलाकार अपने जीवन और कर्म के माध्यम से सकारात्मकता, संवेदनशीलता और संस्कारों को आत्मसात करें, तो उनका प्रभाव अनेकों दर्शकों के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

इस अवसर पर साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए आंतरिक शांति और आत्म-चेतना अत्यंत आवश्यक है। ग्लैमर और सफलता के शिखर पर पहुँचकर भी यदि मन अशांत है, तो वह सफलता अधूरी है। जब लोकप्रिय चेहरे अध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण और सेवा के संदेश से जुड़ते हैं, तो उसका प्रभाव समाज में दूरगामी होता है।

श्रेष्ठी रोड़ी जी ने अपने भाव साझा करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन आकर उन्हें एक नई ऊर्जा और स्पष्टता का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि टेलीविजन कलाकार होने के नाते उनकी जिम्मेदारी केवल अभिनय तक सीमित नहीं है, बल्कि वे अपने कार्य से युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और भारतीय संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा देना चाहती हैं। माँ गंगा की आरती के दौरान उन्हें जो शांति और भावनात्मक जुड़ाव महसूस हुआ, वह शब्दों से परे है।

परमार्थ निकेतन सदैव से ही अध्यात्म, योग, ध्यान, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों का वैश्विक केंद्र रहा है। यहाँ देश-विदेश से आने वाले साधक, युवा, कलाकार और विचारक भारतीय संस्कृति की गहराई को अनुभव करते हैं। श्रेष्ठी रोड़ी जी का यह आगमन इस बात का सशक्त संदेश है कि आधुनिकता और अध्यात्म परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।

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