उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति ने अपनी मांगों को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया
देहरादून:उत्तराखंड सेवानिवृत्त कार्मिक समन्वय समिति के अध्यक्ष पूर्व अपर सचिव कार्मिक एस एस बल्दिया के नेतृत्व में आज भारत सरकार के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
इस अवसर पर विभिन्न संगठनों के पेंशनर शामिल थे। ज्ञापन में आठवें वेतन आयोग के गठन से संबंधित 3 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना से देश के पेंशनर समाज में उत्पन्न शंकाओं के निराकरण को लेकर मांगे प्रेषित की गई है। इनमें जनवरी 2026 से पूर्व पुरानी पेंशन स्कीम के अंतर्गत आने वाले पेंशनरों की पेंशन के पुनिरीक्षण के विषय को वेतन आयोग की परिधि से बाहर करने के निर्णय पर आपत्ति जारी की गई है।बताया गया है कि वेतन एवं पेंशन सरकार का कमिटेड एक्सपेंडिचर है।प्रत्येक वर्ष नॉन कमिटेड एवं कमिटेड एक्सपेंडिचर का आकलन करते हुए ही सरकार द्वारा बजट संसद में पारित होता है।इसे अनफंडेड कॉस्ट बताया जाना सरकार के इरादों पर संदेह व्यक्त कर रहा है। जिसका विरोध देश भर के पेंशनर्स के रहे हैं।ज्ञापन में कहा गया है की पेंशन सरकार द्वारा अपने पेंशन भोगियों को प्रदान किये जाने वाला सामाजिक न्याय है। पेंशन को न केवल पिछली सेवाओं के लिये एक पुरस्कार के रूप में माना जाता है, बल्कि कर्मचारियों को बुढ़ापे में अभाव से बचाने के लिये भी माना जाता है। जैसे-जैसे बुढापा आगे बढ़ता है, पेंशनभोगी को अपने भविष्य भविष्य के लिये अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। इसलिये हर 5 साल बाद 5% पेंशन वृद्धि, विकलॉगता, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के साथ-साथ 12 साल बाद पेंशन के राशिकरण हिस्से की बहाली जैसी पेंशनभोगियों की लम्बे समय से लम्बित मांगों को 8वे केन्द्रीय वेतन आयोग के विचारार्थ हम भेज रहे हैं। अंत में कहा गया है की देश विश्व की तीसरी सबसे बडी अर्थ व्यवस्था बनने जा रहा है और इसलिये अब आर्थिक साधन अनुमति देते हैं, तो वृद्धि की जानी चाहिए। अंत में लिखा गया है की केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के पेंशनभोगियों को मिलाकर देश में लगभग 01 करोड से अधिक पेंशनभोगी हैं। समय की मांग है की 8 वें वेतन आयोग में कार्मिकों के साथ साथ पूर्व की भाती पेंशनर्स की पेंशन में भी न्यायोचित वृद्धि की जाय।
