*विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस* के अवसर पर जन संवाद का आयोजन किया गया
संवाद में कहा गया कि सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद क्रियान्वयन में कोई भी सरकारी विभाग, प्राधिकरण अभी तक नदी तट के 100 मीटर क्षेत्र में नए निर्माण पर रोक लगाने में असफल साबित हुए हैं
देहरादून। आज दिनांक 26-सितम्बर को पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत *विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस* पर संयुक्त नागरिक संगठन एवं धाद संस्था के संयुक्त तत्वावधान में जन संवाद का आयोजन नेमी रोड़ स्तिथ मुख्य कार्यालय में किया गया।
दून के पर्यावरण स्वास्थ्य को भावी आपदाओं से सुरक्षित बनाने की चिंताओं से घिरे पर्यावरण प्रेमियों ने बताया 1991 में 6.8 तथा 2020 में भी 5.8 तीव्रता के भूकंप यहां आए थे, जिनमें जानमाल की क्षति हुई थी।
कहा कि दून जोन 4 में है जहां भूकंप की संभावित तीव्रता आठ तक है। जो गंभीर खतरे का प्रतीक है।आपदा प्रबंधन विभाग, शहरी विकास विभाग को अब दून में कंक्रीट के उगते ऊंचे जंगलों के निर्माण पर पर तत्काल रोक लगानी ही होगी। संवाद में कहा गया की सर्वोच्च न्यायालय तथा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद क्रियान्वयन में कोई भी सरकारी विभाग, प्राधिकरण अभी तक नदी तट के 100 मीटर क्षेत्र में नए निर्माण पर रोक लगाने में असफल साबित हुए हैं जिसका जीता जागता सबूत मालदेवता औऱ कालीगार्ड क्षेत्र व अन्य नदीयों का रुख ही मोड़कर बनाया गया रिसॉर्ट/होटल व भवन हैं जिसके अवैधानिक निर्माण से यहां 100 से लेकर 150 मीटर सड़क का सूपड़ा साफ हो गया और आमजन को दिक्कत हुई।ऐसे निर्माण को ठीक उसी तरह ध्वस्त किया जाय जैसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार नोएडा में अंसल कंपनी के ट्विन टावरों को बारूद लगाकर ध्वस्त किया गया था!जागरूक नागरिको ने यह भी बताया की दून में 129 मलिन बस्तियां हैं और 10630 अतिक्रमण चिह्नित है। अवैध निर्माण से नदियों के कैचमेंट एरिया में भी नदियों को अपने प्राकृतिक स्वरूप से विमुख किया जा रहा है। अतिक्रमण से रिसपना, बिंदाल, सोंग, तमसा, सुसवा, टोंस और इनकी सहायक नदियों की चौड़ाई अवैध रूप से लगातार संकुचित की जा रही है।भविष्य में संभावित भयंकर बाढ़ में यहां जान माल को खतरा उत्पन्न हो गया है। वक्ताओं ने सहस्त्रधारा क्षेत्र में बाल्दी नदी क्षेत्र की भूमि को नाप भूमि में बदल कर यहां खसरे खतौनी ही बदलने की साजिश और इस प्रकरण पर हुई विस्तृत संयुक्त जांच की शासन को भेजी गई पत्रावली ही गुम होने पर इसे भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण बताया। वक्ताओं ने सरकार से इस मामले की एसआईटी से जांच कराने की भी मांग की है जिससे इस पत्रावली में आए तथ्यों के आधार पर यहां नदी किनारो पर अनाधिकृत रूप से बनाए गए रिसोर्ट होटल आदि की असलियत सामने आ सकेगी।वक्ताओं का कहना था की सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अंतर्गत नदियां, झीलें, जलस्रोत जनता की साझा धरोहर हैं, इन पर अवैध कब्जा गलत है। सुझाव था कि हाल में हुईं भयंकर बारिश का आकलन कर संभावित बाढ़ क्षेत्र की सीमाएं अभी से सुनिश्चित की जाए। नदी किनारो पर अतिक्रमण को ध्वस्त करते हुए नदियों नालों के दोनों और पेड़ लगाकर हरित क्षेत्र विकसित किया जाए जिससे कटाव रुकेगा और पारिस्थितिक नुकसान भी नहीं होगा। संवाद का निष्कर्ष था की यहां भयंकर बारिश से सड़कों ने नदियां का रूप ले लिया था क्योंकि राजधानी के ड्रेनेज सिस्टम धरातलीय सर्वे की जगह फाइलों में बने।ड्रेनेज सिस्टम में सामने आई कमियों में व्यापक सुधार की जरूरत है। संवाद में राजधानी के ब्रिजों के क्षतिग्रस्त होने का मुख्य कारण नदियों में रिवर चैनलाइजेशन न होना बताते हुए इनका शीघ्र सेफ्टी ऑडिट कराए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। शहर की सड़कों पर वाहनों के लगते जाम से बढ़ते प्रदूषण से मुक्ति हेतु सड़कों के ऊपर एलिवेटेड रोड बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। निष्कर्ष रहा की दून के अस्वस्थ पर्यावरण की चिकित्सा के लिए सचिवालय में बैठे अधिकारी खुद धरातल पर आकर वस्तुस्थिति का जायजा ले और तभी विकास की योजनाएं बनाएं। अंत में जिला मजिस्ट्रेट देहरादून सविन बंसल द्वारा आपदा काल में दिनरात एक कर पीड़ितों को राहत पहुंचाने पर इनकी प्रशंसा भी की गई।
संवाद के अन्त मेँ यह निर्णय लिया गया कि सयुंक्त नागरिक संगठन जल्द ही दून को बचाने के लियॆ मुख्य सचिव व मसूरी देहरा प्राधिकरण के साथ ही वन मुख्यालय व नगर निगम व स्मार्ट सीटी से वार्ता कर समस्या व सुझाव रखेगा।
आज संवाद कार्यक्रम मेँ पर्यावरणविद पद्मश्री कल्याणसिंह रावत, दिनेश सक्सेना, आशा डोभाल, ब्रिगेडियर केoजीo बहल, जितेंद्र डांडोना, मेजर एमo एसo रावत, गिरीश चंद्र भट्ट, अवधेश शर्मा, डॉ.एसoएसo खेरा, रविंदर सिंह गुसाई, दिनेश भंडारी, डॉoराकेश डंगवाल, ठाकुर शेरसिंह, सुशील त्यागी,जीएस जस्सल,प्रदीप कुकरेती, खुशबीर सिंह, कर्नल विक्रम थापा, आशा लाल, दीपक जोशी, आशा डोभाल , दिनेश भंडारी , प्रकाश नागिया आदि शामिल थे।
