भविष्य की आहट / डा. रवीन्द्र अरजरिया

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बाढ़ : प्राकृतिक आपदा या ‘डीप स्टेट’ का वेदर वार

विभिन्न स्थानों पर बाढ़ का प्रकोप चरमसीमा पर है। अनेक स्थानों पर जलप्रलय जैसी स्थितियां निर्मित हो रहीं हैं। एक ही क्षेत्र में कई बार बादल फटने जैसी घटनायें सामने आ रहीं हैं। मौसम वैज्ञानिक भी अचानक होने वाले इन वायुमण्डलीय परिवर्तनों पर आश्चर्यचकित हैं। आम आवाम इसे प्रकृति विरुद्ध किये जाने वाले मानवीय कृत्यों की परिणति के रूप में देख रहा है। उसका मानना है कि पर्यावरणीय संतुलन की अनदेखी करते हुए स्वार्थ पूर्ति हेतु चन्द लोगों ने मनमाने तरीके संगठित रूप से अपनाये, प्राकृतिक संपदा का खतरनाक दोहन किया और संजोया वर्चस्व की जंग में जीत का सपना। परमाणु विस्फोट, जंगीय घटनायें और उपग्रहों जैसे कारक इस सबके लिए उत्तरदायी माने जा रहे हैं। इस आमराय के अलावा ‘डीप स्टेट’ के षडयंत्रकारी वेदर वार की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। विगत कुछ दिनों में विश्व के अनेक हिस्सों में भीषण बाढ की स्थितियां सामने आईं है जिनमें भारी तबाही हुई है। अतीत के पन्ने पलटें तो स्थिति भयावह दिखाई पडती है। उदाहरण के लिए केवल अमेरिका के टेक्सास राज्य में गत माह आई भीषण बाढ़ को ही ले लें तो वहां की तबाही, आरोपों-प्रत्यारोपों का गर्म होता बाजार और ‘डीप स्टेट’ का ज्वलंत होता मुद्दा आज विश्वव्यापी हो गया है। ग्वाडालूप नदी में अचानक पानी बढ़ने से केर काउंटी समेत कई इलाकों में जलप्रलय जैसे हालात बन गए थे। केर काउंटी में रिकॉर्ड 11 इंच बारिश से अचानक बाढ़ आ गई और मात्र 45 मिनट में ही पूरा शहर पानी में डूब गया था। इस मूसलाधार बारिश के कारण प्रति घंटे 2-3 इंच तक बारिश दर्ज हुई जिससे टेक्सास हिल कंट्री और ग्वाडालूप नदी के किनारों को सीधा प्रभावित किया। ग्वाडालूप नदी का जलस्तर 45 मिनट में 26 फीट से ज़्यादा और सुबह तक 37.52 फीट की ऊंचाई को छूने लगा, जो एक कीर्तिमान है। इस संबंध में प्राकृतिक आपदा के सामान्य सिद्धान्त के अलावा एक ‘कंस्पिरेसी थ्योरी’ भी सामने आई है जिसमें दावा किया जा रहा है कि यह प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि ‘वेदर वार’ था, जो पूरी तरह से मानव निर्मित था अर्थात ‘वेदर’ को ‘वेपन’ बनाकर प्रहार किया गया था। इस कारक को अनेक अमेरिकी अधिकारी भी समर्थन दे हैं। क्यू-एनोन समुदाय के सदस्यों के अनुसार यह ‘क्लाउड सीडिंग’ है जिसके तहत सिल्वर आयोडाइड, ड्राई आइस जैसे तत्वों की सहायता से इस तरह की स्थितियां निर्मित की जाती हैं। ‘वेटरन्स आन पेट्रोल’ नामक संस्था के संस्थापक माइकल मेयर ने कहा कि टेक्सास पर वेदर वेपन से हमला हुआ है, जिसमें बच्चों की मौतें हुई हैं, ये देशद्रोह है। महिला संगठन ‘वोमेल फार अमेरिका फर्स्ट’ की डायरेक्टर कैंडिस टेलर ने कहा कि फेक बाढ़, फेक तूफान, सब नकली है। पूर्व स्पेशल फोर्स के कमांडर पीट चेम्बर्स ने सवाल उठाते हुए इसी तरह के विचार व्यक्त किये है। एनएसए अधिकारी माइकल फ्लिन ने कहा कि क्या कोई बता सकता है, ये किसने किया? रिपब्लिकन सांसद मार्जरी टेलर ग्रीन ने तो संसद में एक बिल लाने की घोषणा तक कर दी जिसमें किसी भी तरह के रसायनों को वायुमंडल में छोड़कर मौसम बदलने की कोशिश को अपराध माना जाएगा। टास्क फोर्स ने तो बिलगेट्स, पीटर थिल तथा क्लिंटन फाउंडेशन तक पर वेदर वार करने के आरोप लगाये हैं। उल्लेखनीय है कि बिलगेट्स ने अपने बचपन के दोस्त पॉल एलन के साथ मिलकर ‘माइक्रोसॉफ्ट’ की स्थापना की थी जबकि पीटर थिल को ‘पे पाल’ के सह-संस्थापकों के रूप में जाना जाता है। ‘बिल क्लिंटन फाउंडेशन’ तो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन द्वारा स्थापित की गई थी। दूसरी ओर ‘डीप स्टेट’ पर लगाये जा रहे आरोपों का खण्डन करते हुए ह्यूस्टन के मौसम वैज्ञानिक मैट लांजा ने कहा कि ‘क्लाउड सीडिंग’ से इतनी बड़ी बाढ़ संभव नहीं। पहले से मौजूद मौसमी परिस्थितियां ही इस तबाही के लिए जिम्मेदार थीं। ‘रेनमेकर’ नामक ‘क्लाउड सीडिंग’ कंपनी के संस्थापक अगस्टस डोरिको ने कहा कि हम कोई ‘डीप स्टेट’ प्लांट नहीं हैं और न ही बिल गेट्स या सीआईए से जुड़े हैं, हम पारदर्शिता के पक्षधर हैं। रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने कहा कि ऐसी बातों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। डीप स्टेट से जुडे लोग इस बात को प्रचारित करने में जुटे है कि इस बारिश का कारण उष्णकटिबंधीय तूफान बैरी के अवशेषों और मेसोस्केल कन्वेक्टिव वोर्टेक्स यानी एमसीवी के मिलना है। अमेरिका के इस उदाहरण के आधार पर भारत सहित अन्य देशों में आकार ले रहे वर्षा के दावानल को वैज्ञानिक नजरिये, पर्दे के पीछे से चल रहे षडयंत्रकारी प्रयोगों और अत्याधुनिक तकनीक के आधार पर समझना बेहद आवश्यक है। ‘डीप स्टेट’ की कारगुजारियों को जहां टास्क फोर्स सहित अनेक संगठन और वैज्ञानिक रेखांकित कर रहे हैं वहीं ‘रेनमेकर’ नामक ‘क्लाउड सीडिंग’ कंपनी के संस्थापक अगस्टस डोरिको का यह कहना कि हम कोई ‘डीप स्टेट’ प्लांट नहीं हैं और न ही बिल गेट्स या सीआईए से जुड़े हैं, अपने आप में अनेक प्रश्नों के उत्तर प्रदान कर देता है। इस संबंध में वैदिक ग्रन्थ भी प्रमाण के रूप में उपलब्ध हैं जिनमें सतयुगकालीन देव-दैत्व युद्ध, त्रेताकालीन राम-रावण युद्ध तथा द्वापरकालीन महाभारत को रेखांकित किया गया है। इन युद्धों में अग्निबाणों को समाप्त करने हेतु जलबाण चलाये गये थे यानी वर्षा करने वाले शस्त्र उस समय के परा विज्ञान के दिग्गजों के पास उपलब्ध थे। उस समय विमान, अमोघ शस्त्र, कवच आदि होने की बात कही गई है जो वर्तमान में वायुयान, मिसाइल, डिफेंस सिस्टम के रूप में निरंतर विकसित हो रहे हैं। ऐसे में एक ही स्थान पर बार-बार बादल फटने, निरंतर बारिश होने, सूखे स्थानों पर बाढ आने जैसी स्थितियां ‘डीप स्टेट’ के षडयंत्रकारी प्रहार की संभावना को बल प्रदान करतीं है। इस हेतु देश को व्यापक तैयारी करने की आवश्यकता है तभी प्राकृतिक प्रकोप की आड में प्रहार करने वालों से निपटा जा सकेगा। इस बार बस इतना ही। अगले सप्ताह एक नई आहट के साथ फिर मुलाकात होगी।

Dr. Ravindra Arjariya
Accredited Journalist
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