मोरान्दावा शहर के राजसी और पवित्र वृक्ष का नाम बाओबाब

इनमें से अधिकांश बाओबाब 800 साल से अधिक पुराने हैं, जो लंबे समय पहले द्वीप पर पनपे घने जंगलों की विरासत है। बाओबाब, जिसे बोतल का पेड़ भी कहा जाता है, ये "प्रकृति का अभयारण्य" और "पारिस्थितिक गहना" ऐसा विशेषण हैं जो मेडागास्कर की प्राकृतिक संपदा को समृद्ध बनाते हैं। बाओबाब को मालागासी में "रेनिआला" ("जंगल की माँ") भी कहा जाता है। बाओबाब पानी का एक महत्वपूर्ण भंडार है जो इसे चरम जलवायु परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता प्रदान करता है। इसकी सूंड में पानी भरा होने के कारण बाओबाब को "बोतल का पेड़" भी कहा जाता है। बाओबाब की प्रजातियां 9 मीटर व्यास और 30 मीटर ऊंचे तक मापी गयी हैं। ऐसा कहा जाता है कि बाओबाब की अजीबोगरीब आकृति इस तथ्य के कारण है कि इसे उल्टा लगाया गया होगा, जड़ें आकाश की ओर रोप दी होंगी। यहां के लोग वृक्षों को अपने पूर्वजों की आत्मा मानकर भी पूजते हैं।

मोरान्दावा शहर के राजसी और पवित्र वृक्ष का नाम बाओबाब


सोल ऑफ इंडिया
डॉ0 हरिनारायण जोशी अंजान
मेडागास्कर की राजधानी से लगभग 570 किलोमीटर दूर मोरान्दावा शहर है। यहां की भाषा मलागासी है। यह विशेष प्रकार की वनस्पतियों और पेड़ों के लिए जाना जाता है। चित्र में दिख रहे इस राजसी और पवित्र वृक्ष का नाम बाओबाब है। जिसकी दुनिया में आठ प्रजातियां पायी जाती हैं । उनमें से छह केवल मेडागास्कर में पायी जाती हैं। बाओबाब गली (Alley Des Baobabs)  दुनिया में एक नमूना है, जिसमें उसके प्रभावशाली आकार का एहसास किया जाता है। 
इनमें से अधिकांश बाओबाब 800 साल से अधिक पुराने हैं, जो लंबे समय पहले द्वीप पर पनपे घने जंगलों की विरासत है। 
बाओबाब, जिसे बोतल का पेड़ भी कहा जाता है, ये
"प्रकृति का अभयारण्य" और "पारिस्थितिक गहना" ऐसा विशेषण हैं जो मेडागास्कर की प्राकृतिक संपदा को समृद्ध बनाते हैं।  बाओबाब को मालागासी में "रेनिआला" ("जंगल की माँ") भी कहा जाता है। 
बाओबाब पानी का एक महत्वपूर्ण भंडार है जो इसे चरम जलवायु परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता प्रदान करता है। इसकी सूंड में पानी भरा होने के कारण बाओबाब को "बोतल का पेड़" भी कहा जाता है। 
बाओबाब की प्रजातियां 9 मीटर व्यास और 30 मीटर ऊंचे तक मापी गयी हैं।  ऐसा कहा जाता है कि बाओबाब की अजीबोगरीब आकृति इस तथ्य के कारण है कि इसे उल्टा लगाया गया होगा, जड़ें आकाश की ओर रोप दी होंगी। यहां के लोग वृक्षों को अपने पूर्वजों की आत्मा मानकर भी पूजते हैं।