ब्लड वेसल्स/रक्तवाहिनियों में बनने वाला कैल्शियम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बन सकता है कारण

कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने से एथेरोसेलेरोसिस हो जाता है, जिसमें आर्टिरीज में स्टिकी डिपॉजिट यानी प्लेक जम जाता है, जो परेशानियों का कारण बनता है। समय के साथ आर्टरी सिकुड़ने लग जाती है और कठोर होती हैं। इसलिए इस दिशा में जागरूकता और समय पर बचाव की जरूरत है। साथ ही जीवन शैली में सुधार भी आवश्यक है।

ब्लड वेसल्स/रक्तवाहिनियों में बनने वाला कैल्शियम हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बन सकता है कारण

देहरादून। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमरपाल सिंह गुलाटी ने बताया, “कि ब्लड वेसल्स में कैल्शियम जमने से हार्ट पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि हाइपरक्लेशिमिया (यानी खून में अधिक मात्रा में कैल्शियम का होना) मृत्यु दर और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज बढ़ाने का एक कारण है। समय के साथ कैल्शियम और कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ने से एथेरोसेलेरोसिस हो जाता है, जिसमें आर्टिरीज में स्टिकी डिपॉजिट यानी प्लेक जम जाता है, जो परेशानियों का कारण बनता है। समय के साथ आर्टरी सिकुड़ने लग जाती है और कठोर होती हैं। इसलिए इस दिशा में जागरूकता और समय पर बचाव की जरूरत है। साथ ही जीवन शैली में सुधार भी आवश्यक है। क्योंकि कैल्शियम बढ़ने के कोई सटीक कारण अभी तक ज्ञात नहीं है। इसलिए इसके खतरे को टालने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं, अन्यथा लंबे समय में होने वाली एथेरोसिलेरोसिस, क्रॉनिक डैमेज और हार्ट कॉम्प्लिकेशंस को बढ़ा सकती हैं।
इस बारे में बात करते हुए देहरादून के सिनर्जी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमरपाल सिंह गुलाटी ने बताया, “कि ब्लड वेसल्स में कैल्शियम जमने से हार्ट पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कोलेस्ट्रॉल के साथ इसका संयोजन प्लेक के निर्माण का कारण बन सकता है, जो कि आर्टरीज की दीवारों पर चिपक जाता है। यह जमाव आर्टिरीज के थोड़े या पूरी तरह ब्लॉकेज का कारण बन जाता है और यह दीवारों को कठोर भी कर देता है। अधिक उम्र के हार्ट समस्या से ग्रसित मरीजों की हार्ट आर्टरीज में केलीफ्लिक फ्लेक होता है। जिन मरीजों के ब्लड प्रेशर पर सही नियंत्रण ना होने के कारण आर्टरीज कठोर होती हैं, उनकी हार्ट आर्टरीज में कैल्शियम का जमाव अधिक हो सकता है। समय के अंतराल में कैल्शियम का यह अधिक जमाव परेशानी को बढ़ा सकता है। मरीजों के कुछ समूह को अन्य समस्याएं जैसे रूमेटाइड अर्थराइटिस के चलते भी आर्टरीज में अतिरिक्त कैल्शियम जमा हो सकता है। इसलिए आवश्यक है कि आप उपचार किये जा सकने वाले रिस्क फैक्टर्स जैसे हाइपरटेंशन का प्रबंधन करें। यह अतिमहत्वपूर्ण है’।
डॉ गुलाटी ने बताया कि अत्यधिक कैल्शियम जमा होने के लक्षण इस पर निर्भर करते हैं कि कौन सी आर्टरीज ब्लॉक्ड है। यदि यह कोरेनरी आर्टरी है तो व्यक्ति को छाती में दर्द, सांस की तकलीफ, धीमी या तेज हार्ट बीट महसूस होगी। यदि ब्लॉकेज ब्रेन को रक्त पहुंचाने वाली आर्टरीज में होता है, तो व्यक्ति को थकान, कमजोरी, चक्कर आना, मेमोरी लॉस, आदि महसूस हो सकता है। जिनकी पांव और बांह की आर्टरीज में कैल्शियम जमाव होगा उन्हें हाथ-पैरों में कमजोरीध्सुन्नपन, ऐंठन महसूस होगा। इस स्थिति से बचने के लिए युवा उम्र से ही सावधानी बरतने की आवश्यकता है। हार्ट के केलिफ्लिक ब्लॉकेज के उपचार के अनेक विधियां हैं। हार्ट वेसल्स में कैल्शियम प्लेक की पहचान सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी और कन्वेंशनल एनजियोग्राफी की मदद से की जा सकती है।