पुस्तक कलयुग संजीवनी का किया गया लोकार्पण

पुस्तक के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए लेखक अभिषेक शर्मा को बधाई दी एवं उनके प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग के बदलते परिवेश मे आज का मानव धर्म, न्याय, नीति, सदाचार, आस्था, आध्यात्म, सदभाव व सज्जनता को जैसे भूलकर ही बैठ गया हो, ऐसा प्रतीत होता है। ऐसे में यह पुस्तक लोगों के हृदय को झंझौरे और उन्हें कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करे, एसी मेरी कामना है। कलयुग संजीवनी की मुख्य विशेषता यह है कि पाठकों की रुचि के अनुरूप इस पुस्तक में लेखक द्वारा हिंदी में काव्य रूप में अनुवादित राष्ट्रीय गीत ष्वन्दे मातरम्ष् को भी विशेष स्थान दिया गया है।

पुस्तक कलयुग संजीवनी का किया गया लोकार्पण

हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज में प्रति उपकुलपति डॉ चिन्मय पंड्या के करकमलों द्वारा अभिषेक शर्मा द्वारा रचित पुस्तक कलयुग संजीवनी का लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर ओ. पी.शर्मा (निवर्तमान एक्जीक्यूटिव-दि ट्रिब्यून), कैलाश चंद्र शर्मा (प्रबंधक-बिरला चैरिटेबल ट्रस्ट), अशोक कुमार, राहुल देव प्रजापति व पुस्तक के लेखक अभिषेक शर्मा भी उपस्थित थे। डॉ चिन्मय पंड्या जी ने पुस्तक के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करते हुए लेखक अभिषेक शर्मा को बधाई दी एवं उनके प्रयास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आधुनिक युग के बदलते परिवेश मे आज का  मानव धर्म, न्याय, नीति, सदाचार, आस्था, आध्यात्म, सदभाव व सज्जनता को जैसे भूलकर ही बैठ गया हो, ऐसा प्रतीत होता है। ऐसे में यह पुस्तक लोगों के हृदय को झंझौरे और उन्हें कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करे, एसी मेरी कामना है। कलयुग संजीवनी की मुख्य विशेषता यह है कि पाठकों की रुचि के अनुरूप इस पुस्तक में लेखक द्वारा हिंदी में काव्य रूप में अनुवादित राष्ट्रीय गीत ष्वन्दे मातरम्ष् को भी विशेष स्थान दिया गया है।