एक सामाजिक बात, नहर जीवन दायनी होने के साथ साथ कितनी जानलेवा हैं

एक तरफ़ चलने के लिये सड़क व बगल में बहने वाली नहर जीवन दायनी होने के साथ साथ कितनी जानलेवा हैं, ये अक्सर आपने यहां वाहन समेत समा जाने वाले लोंगो के विषय में सुनकर जाना होगा, उत्तराखण्ड की इस तरह की शक्ति नहरें यदा कदा निरीह परिवारो को शक्ति हीन बनाने में तुली रहती है,

एक सामाजिक बात, नहर जीवन दायनी होने के साथ साथ कितनी जानलेवा हैं
gangnahar

एक सामाजिक बात
एक तरफ़ चलने के लिये सड़क व बगल में बहने वाली नहर जीवन दायनी होने के साथ साथ कितनी जानलेवा हैं, ये अक्सर आपने यहां वाहन समेत समा जाने वाले  लोंगो के विषय में सुनकर जाना होगा, उत्तराखण्ड की इस तरह की शक्ति नहरें यदा कदा निरीह परिवारो को शक्ति हीन बनाने में तुली रहती है, क्या गलती इसके किनारे चलने वालों की है! सोचिये, 
विकासनगर की शक्ति नहर में दंपती अपने यूटीलिटी वाहन समेत समा गए, अपने लिये डाकपत्थर कोई दो पहिया वाहन देख कर घर लौट रहे थे, दोनों के अंततः शव बरामद हुये,  इंसान बॉडी बन गए,
 संतुलन कैसे बिगड़ा, क्यों बिगड़ा ये अलग विषय है, पीछे जिन्हें छोड़ गए बिलखता, उनका क्या?
क्या है इन शक्ति नहरों का रहस्य, क्योँ ये इतनी क्रूर होती जा रही हैं! मैं तो सिहर उठता हूं , या तो इन नहरों के दोनों तरफ ऐसी मजबूत बेरिकेटिंग कर दी जाए कि कोई नदी की तरफ किसी भी रूप में नहीं जा पाए। जहां से इन नहरों में जाने की आवश्यकता हो वहां गेट बना दिए जाए।
वहीं क्या इनसे दूर रहकर नहीं चला जा सकता, हमें ही सम्भलना, थमना होगा, अब इनकी शक्ति कौन बाँध सकता है! क्या सही है, क्या होना चाहिए, कुछ समझ नहीं आता, हे ईश्वर