दक्षिणावर्ती शंख है मॉं लक्ष्मी का प्रिय: शुभ कार्य में बेहद शुभ माना जाता है शंख

हिन्दू पूजा पद्धतियों में शंख का पुरातन काल से ही बड़ा महत्व रहा है। चाहे रणभेरी का समय हो या किसी देवी-देवताओं से सम्बंधित पूजा पाठ कार्यक्रम, सभी में शंख अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका में शोभायमान रहता है। किसी ब्राह्मण को जब घर में पूजा कथा के लिए आमंत्रित किया जाता था तो वह बड़े आराम से अपने कंधे वाले थैले से अपना पुराना शंख निकालकर पूजा स्थल पर रखते हुए दिखते थे, उसे देखते ही हम कौतुहलपूर्वक कहते थे, पंडाजी पहले इसे बजाकर दिखाओ।

दक्षिणावर्ती शंख है मॉं लक्ष्मी का प्रिय: शुभ कार्य में बेहद शुभ माना जाता है शंख
SHANKH

अविरल/ भारत

हिन्दू पूजा पद्धतियों में शंख का पुरातन काल से ही बड़ा महत्व रहा है। चाहे रणभेरी का समय हो या किसी देवी-देवताओं से सम्बंधित पूजा पाठ कार्यक्रम, सभी में शंख अपनी बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका में शोभायमान रहता है। किसी ब्राह्मण को जब घर में पूजा कथा के लिए आमंत्रित किया जाता था तो वह बड़े आराम से अपने कंधे वाले थैले से अपना पुराना शंख निकालकर पूजा स्थल पर रखते हुए दिखते थे, उसे देखते ही हम कौतुहलपूर्वक कहते थे, पंडाजी पहले इसे बजाकर दिखाओ। किसी भी शुभ कार्य में शंख को बेहद शुभ माना जाता है हालांकि यह एक घोंघा रूपी जीव का खोल ही होता है परंतु चाहे वो पूजा पाठ हो या शादी ब्याह, हर जगह इसे शंख की संज्ञा के साथ उपयोग किया जाता है।

शंख देखने में शरीर सौष्ठव में तो कई प्रकार के होते हैं लेकिन उपयोग के लिए वही शंख रखा जाता है जो कर्णप्रिय गुंजायमान ध्वनि की क्षमता रखता हो। इसमें दायांवर्ती व बांयावर्ती दोनो प्रकार के शंख होते हैं, एक सीधे हाथ पर रखकर उपयोग होने वाला व दूसरा उल्टे हाथ पर रखकर उपयोग होने वाला। कथानकों के अनुसार मां लक्ष्मी के हाथों में सुशोभित शंख दक्षिणावर्ती शंख है। इसे लक्ष्मी शंख भी कहा जाता है। इस शंख का मुंह दाहिने ओर खुलता है, जबकि आमतौर पर मिलने वाले शंख का मुंह बायीं ओर खुलता है। कहा जाता है कि अगर व्यक्ति धन सम्बंधी समस्यओं से गुजर रहा हो तो उसे दक्षिणावर्ती शंख को मां लक्ष्मी के सामने लाल कपड़े पर रखकर पूजा करनी चाहिए। ऐसा प्रयोग करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। शंख से शुक्र ग्रह से संबंधिक दोष दूर होता है और शुक्र ग्रह को प्यार का ग्रह माना जाता है।

  1. शंख बजाने से प्राणायाम की तीन क्रियाएं कुम्भक, रेचक, पूरक एक साथ होती हैं।शंख बजाने से हृदयाघात, रक्तचाप की अनियमितता, दमा, मंदाग्नि में लाभ होता है, शंख बजाने से फेफड़े पुष्ट होते हैं।
  2. शंख की आकृति और पृथ्वी की संरचना समान है। वैज्ञानिक संस्था नासा के अनुसार – शंख बजाने से खगोलीय ऊर्जा का उत्सर्जन होता है जो जीवाणु का नाश कर लोगो को ऊर्जा व शक्ति का संचार करता है।
  3.  स्वास्थ्य की दृष्टि से देखा जाए तो शंख में 100% कैल्शियम है, इसमें रात को पानी भर के पीने से शरीर में  कैल्शियम की  पूर्ति होती है।
  1. शंख की ध्वनि से दिमाग व स्नायु तंत्र सक्रिय रहता है, शंख में पानी रख कर पीने से मनोरोगी को लाभ होता है उत्तेजना कम होती है।
  2. सोमवार को शंख में दूध भर कर शिव जी को चढाने से चन्द्रमा ठीक होता है।

       6.बुधवार को शालिग्राम जी को शंख में जल व तुलसी जी डाल कर अभिषेक करने से आपकी राशि का बुध ग्रह ठीक होता है।

  1. शंख को केसर से तिलक कर पूजा करने से भगवन विष्णु व गुरु की प्रसन्ता मिलती है।

                                                                                                                           फोटो संकलन- भारत भूषण